Sabhyata Ka Rahasya by Premchand Munshi

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Part 5 of total 5 stories in series Mansarovar Part 4.
  

यों तो मेरी समझ में दुनिया की एक हजार एक बातें नहीं आती—जैसे लोग प्रात:काल उठते ही बालों पर छुरा क्यों चलाते हैं ? क्या अब पुरुषों में भी इतनी नजाकत आ गयी है कि बालों का बोझ उनसे नहीं सँभलता ? एक साथ ही सभी पढ़े-लिखे आदमियों की आँखें क्यों इतनी कमजोर हो गयी है ?

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Nandlal Nahi Re Aavu by Mirabai

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નંદલાલ નહિ રે આવું, ઘરે કામ છે,
તુલસીની માળામાં શ્યામ છે;
વૃંદા તે વનને મારગ જાતાં,
રાધા ગોરી ને કાન શ્યામ છે … નંદલાલ.

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