Category: Premchand Munshi

Premchand (31 July 1880 – 8 October 1936), better known as Munshi Premchand, Munshi being an honorary prefix, was an Indian writer famous for his modern Hindustani literature. He is one of the most celebrated writers of the Indian subcontinent, and is regarded as one of the foremost Hindustani writers of the early twentieth century. Born Dhanpat Rai Srivastav, he began writing under the pen name “Nawab Rai”, but subsequently switched to “Premchand”. A novel writer, story writer and dramatist, he has been referred to as the “Upanyas Samrat” (“Emperor among Novelists”) by some Hindi writers. His works include more than a dozen novels, around 250 short stories, several essays and translations of a number of foreign literary works into Hindi.


Prem Ka Hridaya

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Part 3 of total 3 stories in series Mansarovar Part 4.
  

भोंदू पसीने में तर, लकड़ी का एक गट्ठा सिर पर लिए आया और उसे जमीन पर पटककर बंटी के सामने खड़ा हो गया, मानो पूछ रहा हो ‘क्या अभी तेरा मिजाज ठीक नहीं हुआ ? ‘

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Sadgati

Part 2 of total 3 stories in series Mansarovar Part 4.
  

दुखी चमार द्वार पर झाडू लगा रहा था और उसकी पत्नी झुरिया, घर को गोबर से लीप रही थी। दोनों अपने-अपने काम से फुर्सत पा चुके थे, तो चमारिन ने कहा, ‘तो जाके पंडित बाबा से कह आओ न। ऐसा न हो कहीं चले जायँ।‘

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Do Kabren by Premchand Munshi

Part 1 of total 3 stories in series Mansarovar Part 4.
  

अब न वह यौवन है, न वह नशा, न वह उन्माद। वह महफिल उठ गई, वह दीपक बुझ गया, जिससे महफिल की रौनक थी। वह प्रेममूर्ति कब्र की गोद में सो रही है। हाँ, उसके प्रेम की छाप अब भी ह्रदय पर है और उसकी अमर स्मृति आँखों के सामने।

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Decree Ke Rypaye by Premchand Munshi

Part 30 of total 30 stories in series Mansarovar Part 3.
  

नईम और कैलास में इतनी शारीरिक, मानसिक, नैतिक और सामाजिक अभिन्नता थी, जितनी दो प्राणियों में हो सकती है। नईम दीर्घकाय विशाल वृक्ष था, कैलास बाग का कोमल पौधा; नईम को क्रिकेट और फुटबाल, सैर और शिकार का व्यसन था, कैलास को पुस्तकावलोकन का;

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Bhade Ka Tatto by Premchand Munshi

Part 29 of total 30 stories in series Mansarovar Part 3.
  

आगरा कालेज के मैदान में संध्या-समय दो युवक हाथ से हाथ मिलाये टहल रहे थे। एक का नाम यशवंत था, दूसरे का रमेश। यशवंत डीलडौल का ऊँचा और बलिष्ठ था। उसके मुख पर संयम और स्वास्थ्य की कांति झलकती थी।

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Aadhaar by Premchand Munshi

Part 28 of total 30 stories in series Mansarovar Part 3.
  

सारे गाँव में मथुरा का-सा गठीला जवान न था। कोई बीस बरस की उमर थी। मसें भीग रही थीं। गउएँ चराता, दूध पीता, कसरत करता, कुश्ती लड़ता था और सारे दिन बाँसुरी बजाता हाट में विचरता था। ब्याह हो गया था, पर अभी कोई बाल-बच्चा न था। घर में कई हल की खेती थी, कई छोटे-बड़े भाई थे।

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